बच्चे के लिए सुविधापूर्ण (टैडी चेंजिंग मैट)

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मैं बात कर रही हूं अपने माँ बनने के सफर के विषय में। माँ बनने के साथ ढेरों जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। जब मैंने अपने बेटे को जन्म दिया और माँ बनी, तो बेशुमार ख़ुशियों के साथ चिंता ने भी मुझे घेर लिया कि क्या मैं खुद को अच्छी माँ साबित कर पाऊँगी? मैंने अपनी माँ से बहुत कुछ सीखा कि कैसे बच्चे की देखभाल करनी है। माँ से ही सीखा की बच्चे की कैसे मालिश करनी है, उसे कितने गुनगुने या सामान्य पानी से नहलाना है। बच्चे के लिए क्या फायदेमंद है और क्या नुकसानदायक।

माँ ने बहुत सारी कॉटन की लगोंट और छोटे-छोटे बिस्तर बनाकर दिये, माँ के समय में तो ये सब ही उपयोगी था। पर आज के समय मे हम माँओ को डायपर से ही बहुत आराम मिल जाता है। लेकिन जब मुझे डायपर बदलना पड़ता तो मुझे डायपर की लीक होने या बदलते समय बिस्तर खराब होने से बहुत चीड़ मचती, क्योंकि फिर बिस्तर को धोना पड़ता।

इससे मैं बहुत परेशान थी, घर मे तो फिर भी इस समस्या से सुलझा जा सकता है, पर जब ऐसी किसी तरह की परेशानी सफ़र में होती, तो सच बेहद खराब लगता। कुछ ऐसा ही हुआ मेरे साथ जब मैंने अपने बेटे के साथ पहला सफ़र किया। मैं अपने तीन महीने के बेटे को लेकर मायके से घर वापस आ रही थी। वापस आते समय चार-पाँच घंटे के सफर में बच्चे का डाइपर लीक हो गया। डाइपर बदलते समय कार की सीट गंदी हो गई। जैसे-तैसे मेरा यह चार-पाँच घंटे का सफर कटा और मैं घर वापस आ गई, लेकिन यह समस्या मेरे साथ लगी हुई थी।

वैसी भी हम माँओ के लिए बाहर निकलने या सफ़र के दौरान ये हमेशा चिंता का विषय रहता है कि स्वच्छता हमारे बच्चे के इर्द-गिर्द जरूर रहे। साथ ही पर्यावरण की भी स्वच्छता पर भी ध्यान जाता है।

ये परेशानी मैंने अपनी जेठानी को बताई, तो उन्होंने मुझे टेड्डी मैट खरीदने का सुझाव दिया और कहा कि उपयोग करके देखो, अभी हॉल ही में मैंने अपनी दोस्त को मैट इस्तेमाल करते देखा है, शायद तुम्हें भी इन समस्याओं में सहयोग मिले। फिर क्या था मैंने फौरन टेड्डी मैट ऑर्डर किया। पैक में मुझे करीब 10 शीट मिलीं।

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पहले तो मन में विचार आया कि क्या यह सच में उपयोगी है? लेकिन यकीन मानिए जब मैंने इसे अपने बेटे के लिए उपयोग किया, तो बेहद खुशी मिली। सच में यह एक जादू जैसा है।

मैट की खासियत:

मैट के बारे में पढ़ा तो पता चला, ‘टेड्डी मैट नरम स्पंजी सामग्री से बना होता हैं, जो तेजी से गीलेपन को अवशोषित करके जेल में परिवर्तित कर देता है। साथ ही इसका क्रिस-क्रॉस डिज़ाइन रिसाव और फैलाव को रोकता है। इसका ऊपर का कवर एंटी बैक्टीरियल होता है, जो हमारे बच्चे को संक्रमण से सुरक्षा देता है।’

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उपयोगी:

हम इस मैट को कई प्रकार से उपयोग में ला सकते हैं:

1: मालिश करते समय मैट का उपयोग कर सकते हैं, ताकि बच्चे की पी से बिस्तर खराब न हो।

2: पार्क, मॉल, या अन्य स्थान पर जहाँ हम बच्चे को प्रैम्प में बिठाकर ले जाते हैं, तो इस मैट को प्रैम्प में बिछाकर रखने से बच्चे के डाइपर लीक होने से या डाइपर न पहनाने से प्रैम्प गंदा नही होता।

3: यदि आप बच्चे को पालने में बिना डाइपर के लिटाना चाहती है, तो ये मैट बिछाकर लिटा सकती है, ताकि पालना गीलेपन से खराब न हो।

4: सफर के दौरान बच्चे की जरूरत के हर सामान के साथ मैट भी रखना हमारे लिए बहुत सहयोगी है। वैसे भी यह मैट एक सामान्य आकार में होता है, जिसे हम अपने साथ पर्स में रखकर यात्रा में ले जा सकते है और छोटे बच्चों के लिए बहुत ही उपयुक्त है। साथ ही यह डिस्पोजेबल होता है।

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मैं तो इस टेड्डी मैट का उपयोग करके बहुत खुश हुई।

शायद जिस समस्या का सामना मैं कर रही थी, ऐसी ही समस्या का सामना अन्य माँए भी करती होंगी, बल्कि यकीनन करते ही हैं।

मैं अन्य माँओं को भी सलाह दूँगी कि आप भी इसका उपयोग करके देखें, सच में आपको भी यह पसंद आएगा।

वंदिता चौरसिया।

Comfortable for baby

Teddyy Changing Mats are made from soft, spongy material that rapidly absorbs any spilled liquid and converts it into a gel that helps keep your baby dry and comfortable. Also, its criss-cross design prevents leakage and spills. It has an antibacterial top cover which protects your child from infection.

It can be used on the floor, in a cradle, or pram, in the car seat, on the mattress, etc. This convenient mat is very suitable for little children. It’s lightweight and quite easy to carry, and it’s also disposable, which makes it the perfect travel companion. I am very happy with my experience with this mat.

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‘तुम एक अच्छी माँ नहीं हो’

एक अच्छी माँ ना होने का अपराध भाव क्या होता है, यह मैं अच्छी तरह से समझती हूँ। 2 दिन हॉस्पिटल में एडमिट होने के बाद, तमाम तरह की परेशानियां झेलने के बाद सिजेरियन डिलीवरी से मुझे एक बेटा हुआ। जिस समय उसका जन्म हुआ बस नशे की हालत में एक झलक ही देख पायी थी, और फिर उससे 1 दिन दूर ICU में थी। दूसरे दिन जब मैं रूम में शिफ्ट हुई तब माँ-बेटे की मुलाकात हुई। उस समय मुझे यह नहीं पता था कि, माँ तो बन गयी हूँ, पर एक अच्छी माँ हूँ या नहीं।तीसरे दिन रात के करीब 2:00 बजे मेरा बेटा अचानक से बहुत रोने लगा। तुरंत ही उसके पापा ने उसे डॉक्टर को दिखाया, तो पता चला बच्चे को गैस की समस्या हो रही थी, जिसकी वजह से उसको तकलीफ थी। 5 दिन बाद मैं घर आ गयी। मेरी सिजेरियन डिलीवरी थी, इसलिए मैं खुद से बहुत ज्यादा काम करने में असक्षम थी। डिलीवरी मेरी मायके में हुई थी, इसलिए पूरे अधिकार से माँ और भाभी से अपने काम बोल दिया करती थी। पर बहुत से ऐसे काम है जो खुद ही करना होता है, वह मैं ही किया करती थी।घर आने के 1 हफ्ते बाद, मेरा बेटा पूरी रात परेशान था और रो रहा था। मुझे उसकी परेशानी समझ नही आ रही थी। पर जल्दी ही उसकी समस्या सामने आ गयी, वह बहुत ज्यादा खांसने और छींकने लगा। उसको ठंडी हवा लगने से ज़ुखाम हो गया। एक-दो दिन कुछ घरेलू उपाय किए, पर उसे आराम नहीं हो रहा था। दिन में तो वह सो जाता और पूरी रात परेशान होता। उसके साथ में रातभर जागा करती थी मैं। फिर तुरंत ही डॉक्टर को दिखाया डॉक्टर ने दवाईयां दी। उन दवाईयों से कभी आराम हो जाए, कभी नहीं। मैंने डॉक्टर से पूछा, “आखिर कैसा जुखाम है, जो सही नहीं हो रहा”? तो डॉक्टर ने बोला: “मैं आपको बताना नहीं चाहता था, आप परेशान हो जाएंगी, पर आपके बेटे को ‘निमोनिया’ हो गया है।(यह सुनकर एक माँ को कैसा लगा होगा शायद आप समझ सकती है।) परेशान होने की जरूरत नहीं है, सही हो जाएगा”। पर मैं देख रही थी कि मेरे बच्चे को आराम नहीं हो रहा था। डॉक्टर से दोबारा ये बात कहने पर कि बच्चे को आराम नही मिल रहा, तो डॉक्टर ने कुछ ऐसा कह दिया, जो मेरे दिल पर लग गयी। उन्होंने कहा कि,”आप कैसी माँ है? आप अपने बच्चे का ध्यान नहीं रख पाती हैं। कितना छोटा है और उसको यह समस्या हो गयी। यह समस्या आप से हुई है, आपको इतनी सर्दी खांसी की समस्या है, एलर्जी की समस्या है, जाहिर सी बात है, आपका फीड करता है, तो आपके बच्चे को भी यह समस्या होगी। आप अपना ध्यान क्यों नहीं रखती है? पानी में कोई काम मत करिए। सिर्फ आराम करिए, बच्चे को भी मत लीजिए। उसको अपना फीड मत कराइये। अगर आप ऐसा नहीं कर पाएंगी तो आपके बच्चे को ठीक होने में काफी समय लग जाएगा”।जब डॉक्टर की यह बातें सुनी तो मुझे बहुत ही बुरा लगा कि, “कैसी माँ हूँ मैं? जो अपने बच्चे का ध्यान नहीं रख पा रही। इस बात से बहुत दुखी थी। पूरी कोशिश करती थी कि, अपने बच्चे का हर तरीके से ख्याल रखू। पर भला आप ही बताइए कि, एक माँ कितने दिन अपने बच्चे को फीड नहीं कराएगी। रोना आता था मुझे, चिड़चिड़ाहट होती थी कि, मैं उसे अपना feed कराऊँ या उसे ऊपर का दूध दूँ। कुछ समझ में नहीं आता था और ऊपर से एक अच्छी माँ ना होने की हीन भावना मेरे मन ही मन बैठती जा रही थी। फिलहाल मायके में दो-ढाई महीने बिताने के बाद, मैं जल्द ही अपने पति के साथ वापस घर आ गयी। फिर यहां शहर में डॉक्टरों को दिखाया। उनके बताए अनुसार कि मेरे बेटे को किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है सिवाय ‘सर्दी खांसी’ के और उनकी कुछ दवाईयों से जल्द ही मेरे बेटे को आराम हो गया। पर हां उन्होंने मुझे सलाह दी कि, ‘आपको नेबुलाइजर अपने साथ रखना होगा, जब भी आपके बेटे को जुखाम की समस्या बढ़ेगी तो, आपको नेबुलाइजर की जरूरत पड़ेगी। यह अगले 5 साल तक के लिए जरूरी है, क्योंकि आपके बेटे को एलर्जी की दिक्कत है’।फिर क्या था आज भी कहीं जाती हूँ, तो सारा सामान हो या ना हो पर बेटे के लिए नेबुलाइजर और कुछ जरूरी दवाईयां साथ होती हैं। सिर्फ इसी डर से कि मेरे बेटे को कहीं कोई समस्या छू भी ना सके। यह बात तो तब की थी, जब नई-नई माँ बनी थी। फिलहाल हाल की कुछ बात बताती हूँ। अभी कुछ दिन के लिए मैं मायके रहने गयी थी। अब तो मेरा बेटा डेढ़ साल का हो गया है, लेकिन शैतानियों में अव्वल नंबर पर है और शैतानियां ऐसी कि बस आप अपना सर पकड़ कर बैठ जाओ। मैं अपने पति के साथ दूसरे शहर में रहती हूँ और मेरे सास-ससुर कहीं और। घर में सिर्फ मैं, मेरे पति और मेरा बेटा। जाहिर सी बात है कि अकेले रहने के कारण सिर्फ मेरी ही जिम्मेदारी होती है कि, मैं घर का एक-एक काम देखूं, पति का ख्याल रखूं, बच्चे का ध्यान रखूं और सारा दिन उसके पीछे-पीछे भागती रहूँ। यह सब करते-करते मैं भी झल्ला जाती हूँ।मुझे भी यह लगने लगता है कि, “क्या मैं इंसान नहीं, मशीन या जानवर हूँ? मेरे पास सिर्फ घर का काम और बच्चे को संभालने के अलावा और कुछ भी नहीं रह गया। सारा दिन बच्चे को संभालना, उसकी शैतानियों को देखते-देखते झल्लाहट हो जाती है। इस वजह से मुझे गुस्सा आ जाता है और गुस्से में चिल्ला देती हूँ, डाट देती हूँ या कभी-कभी मार भी देती हूँ। क्योंकि वह ऐसी शैतानियां ही करता है कि, मैं ऐसा करने पर मजबूर हो जाती हूँ। मेरा यह कोई मकसद नहीं होता कि, मैं उसे किसी प्रकार की शारीरिक चोट दूँ। पहले मैं उसे प्यार से समझाती हूँ, पर है तो वह बच्चा ही, नहीं समझता। मैं भी उसको दो-चार बार, दस बार, समझाने के बाद झल्ला जाती हूँ, कि “बार-बार मैं तुम्हें मना कर रही हूँ, यह काम मत करो, तुम्हें चोट लग जाएगी। पर तुम मानते नहीं हो”। और उस गुस्से में मैं उसे डांट देती हूँ। ऐसे ही जब मैं अपने मायके में थी तो, मेरे बेटे ने मेरी नाक में दम कर दिया। मायके गयी थी कि, चलो कुछ दिन आराम कर लूंगी। घर पर वहां जाने के बाद तो बेटे ने जीना दुश्वार कर दिया। सिवाय शैतानी, सिवाय जोखिम के काम करने के अलावा उसके पास और कोई काम नहीं होता था।सुबह से रात भर या जब तक वह सो नही जाता, यह सब देखते-देखते संभालते झल्लाहट में उस पर गुस्सा निकल जाता। कभी-कभी हाथ भी उठ जाता। यह बात मेरी भाभी ने हंसी-हंसी में मेरे एक परिचित से बोल दिया, “कि अरे यह तो अपनी माँ को इतना परेशान करता है कि पिट जाता है”। तो मेरी परिचित ने कुछ भी ना सोचा, ना समझा, ना जाने की कोशिश की, तुरंत ही मुझे एक टाइटल दे दी कि, “U r not a good Mother”, तुम अपने बच्चे को मारती हो? कैसी माँ हो? उसका बचपन छीन रही हो, अरे वह 5 साल तक ऐसे ही शैतानी करेगा, तुमको अपने आप को संभालना होगा, उस पर गुस्सा करती हो, उसको मार देती हो, यह अच्छी माँ के लक्षण नहीं। सच में तुम एक अच्छी माँ नहीं हो”। यह सुन कर मेरे आंखें भर आयी, मन इतना भारी हो गया कि ‘काटो तो खून नहीं’। अंदर ही अंदर यह बात घर कर गयी है कि, क्या मैं एक अच्छी माँ नहीं हूँ? हर संभव कोशिश तो करती हूँ कि, अपने बच्चे को अच्छी परवरिश दूँ, उसका ख्याल रखू, उसके बाद भी मुझे यह सुनने को मिल जाता है कि ‘मैं एक अच्छी माँ नहीं हूँ’।आखिर सामने वाले को किसने हक दिया कि, मुझ पर, मेरी परवरिश पर उंगली उठाए। लोग तो बस ज्ञान देने के लिए आ जाते हैं, ‘बच्चे को ऐसे मत बैठाओ, ऐसे मत चलाओ, यह मत खिलाओ, ज्यादा क्यों खिला दिया? ऐसे क्यों कर दिया, वैसे क्यों कर दिया, बच्चा ही तो है, शैतानी करेगा, उसको डांट क्यों दिया? उसे मार क्यों दिया? तुम्हारा बच्चा इतना TV देखता है? इतना फोन यूज करता है? तुम अपने बच्चे को TV नहीं दिखाती? फोन नहीं देती? लो कर लो बात, दो तो भी समस्या, न दो तो भी। और ऊपर से जब कोई बड़ा सामने से यह खरी-खोटी सुनाने लग जाएगी कि, “अरे तुमने तो डेढ़ साल में ही अपने बच्चे को दूध पिलाना बंद कर दिया, हमने तो 5 साल अपने बच्चे को दूध पिलाया था, अरे आज कल की माँए कहा अपना दूध पिलाना चाहती है। (अब क्या करे वो माँ जिसके इतना दूध न हो कि, बच्चे का पेट भर जाए), अभी उसकी मालिश करती हो या नहीं? हमने तो 4-5 साल मालिश की थी, तभी तो मेरा बेटा इतना मजबूत है। उसको चम्मच से खाना क्यों खिलाती हो? उसको हाथ से खाना खिलाया करो और ना जाने क्या फिजूल की क्या बातें”।(सही है भाई, हम आज कल की माँओ के पास कहा वक्त होता है जो, आपके बच्चे का ध्यान रखे😊) यह सब सुनने के बाद एक माँ, जो अपने बच्चे की हर संभव कोशिश करती है कि, अच्छी परवरिश दे, तो भला आप ही बताइए कि, उसे क्या feel हो रहा होगा? ऐसा ही कुछ मेरे साथ होता है। आप भी इस बात को अच्छे से समझ रही होंगे कि, जब ऐसी कोई भी बात आपके सामने आती है तो कहीं ना कहीं आपको भी बुरा लगता है। समझती हूँ मैं भी कि, वह बच्चा है, शरारत वही करेगा, मैं नहीं। पर जब वह जोखिम का काम कर रहा है, जिससे उसे चोट लग जाएगी तो क्या माँ का अधिकार नहीं कि, वह उसे प्यार करने के साथ-साथ डांट सके या जरूरत पड़ने पर हल्के हाथ का थप्पड़ ही दे सके? मेरी समझ से तो यह जरूरी है, बच्चे के अंदर एक अनुशासन भी होना चाहिए और अनुशासन के लिए जरूरी है कि, उसको लाड-प्यार के साथ थोड़ा डांट भी दी जाए।बच्चे की परवरिश करने वाली हर एक माँ, चाहे वह वर्किंग वूमेन हो या हाउसवाइफ, अपने बच्चों का कभी नुकसान नहीं चाहती। मैंने देखा है, मेहसूस करती हूँ कि, एक बच्चे के आने के बाद, माँ का जीवन बिल्कुल बदल जाता है। उसका कोई ‘मी टाइम’ नहीं होता। एक प्याली चाय की चुस्की लेने का भी उसके पास वक्त नहीं होता। वैसे तो मुझे चाय पीने की आदत नहीं, पर सुबह की एक प्याली चाय, हमेशा ठंडी ही नसीब होती है।पर कुछ ना कुछ करके एक माँ को अपने लिए भी थोड़ा सा वक्त निकालना चाहिए। अपनी खुशी के लिए भी जीना चाहिए। ऐसा एक माँ कर सकती है, जब उसे उसके परिवार और खासतौर पर उसके जीवन साथी का साथ मिले तो। मेरे पास ज्यादा वक्त तो खुद के लिए नहीं होता है, पर हां कभी-कभी मैं खुद के लिए जी कर खुश हो जाती हूँ। कभी सज-सवर कर, तो कभी अकेले शॉपिंग करके। कभी फोन पर दोस्तों के साथ गप्पे मार कर, कभी अपने रिश्तेदारों से मिल कर और ज्यादातर अपने बच्चे और पति के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताकर या फैमिली आउटिंग से। अगर आपके पास आपका ‘मी टाइम’ नहीं है और कहीं ना कहीं आप भी ऐसी किसी बातों का सामना कर रहे हैं कि, आप एक अच्छी माँ नहीं है तो, इसको अनसुना कर दीजिए, क्योंकि यह किसी को अधिकार नहीं कि हमें वह जज कर सके कि “मैं एक बेहतर माँ हूँ या नहीं”। यह आने वाला भविष्य ही बताएगा।यह मेरा या आपका बच्चा ही बता सकेगा कि आप उसकी अच्छी माँ हो या नहीं। पर हां आप अपनी तरफ से कभी भी हार मत मानना। हर वह अच्छी से अच्छी परवरिश देना जो आपके बच्चे को एक अच्छा इंसान बना सके। साथ में अपने परिवार और हम सफर का साथ जरूर लीजिए कि, खुद आप अपने लिए थोड़ा सा वक्त निकालकर ‘जी’ सकें। क्योंकि एक अच्छी माँ न होने की हीन भावना, एक माँ की नाखुशी का सबसे बड़ा कारण बन जाती हैं। जब एक घर में, परिवार में, माँ खुश होती है, तभी वह परिवार खुश रह सकता है। इसलिये तो कहते है.. #माँखुशतोपरिवारखुश।

हर नयी माँ के लिए (कुछ खास)…

जब तक मैने अपने बेटे को जन्म नही दिया था, बस ये ही लगता था कि मेरी कोख में पल रहा ये नवजात कितनी जल्द मेरी गोद मे आ जाये और वो दिन भी आ गया। पहली बार माँ बनना कितना ही सुखदायी होता है ये शायद शब्दों में नही बया किया जा सकता। पर पहली बार बनी माँ को ढेरों समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। कुछ ऐसा ही मेरे साथ है। बच्चे के स्वास्थ के प्रति हमेशा चिंतित रहती हूँ, ये ही लगता है कि मेरा बेटा स्वस्थ रहें, उसे किसी भी प्रकार की शारिरिक समस्या का सामना न करना पड़े। हमेशा से सुनती आ रही हूँ कि जन्म से छः माह तक बच्चे के लिए माँ का स्तनपान बेहद जरूरी होता है, क्योंकि एक बच्चे को सभी पोशक तत्व मिल सके, इसका सबसे अच्छा स्रोत माँ का दूध है। जब मैंने बच्चे को जन्म दिया, उसके जन्म के पहले घण्टे में मैंने उसे स्तनपान कराया, इस समय माँ के स्तन से एक विशेष तत्व किसे कोलोस्ट्रम कहते है, जो पारदर्शी, पीले रंग या मलाईदार होता है निकलता है। कोलोस्ट्रम बहुत ही विशेष होता है इससे बच्चों में रोगप्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। ये बच्चों के पेट को सही रखता है और इसमें एक मृदुविरेचक प्रभाव भी होता है, जो शुरुआती काले मल (मिकोनियम) को बाहर निकालने में शिशु की मदद करता है। ये सारी बाते तो सही थी, पर जब मैं हॉस्पिटल से 2दिन बाद घर आ गयी तब से एक-डेढ़ माह तक बहुत परेशान थी, क्योंकि मेरा बच्चा स्तनपान करने के बाद भी भूखा रह जाता था, कारण ये था कि सही मात्रा में दूध का उत्पादन नही हो पा रहा था। पेट न भरने के कारण रात में कई बार जाग जाएं और रोये, दिन में भी ये ही हाल था। शुरू में मुझे समझ नही आया, काफी परेशान रहती थी, तभी मेरी माँ ने मेवे वाले दूध में शतावरी मिला कर देना शुरू किया। सतावरी को कई प्रकार से जैसे: दूध में, मेवे के लड्डू में या पंजीरी में मिला कर दिया करती। मुझे इससे फायदा भी हुआ। पर जब तक मायके में थी माँ सब कुछ कर दिया करती, लेकिन जब मैं अपने घर वापस आयी तो घर और बच्चे की जिम्मेदारी को सम्हालने में इतनी व्यस्त हो जाती की कुछ भी खाना पीना याद न रहता या खुद के लिये कुछ खास बनाकर खाने पीने में बहुत आलस आता। मेरी ये समस्या मुझे बहुत ही परेशानी में डाल रही थी, मेरा बेटा भी भूखा रहता, उसका स्वास्थ भी बढ़ नही रहा था, ये सब देख खुद में ग्लानि महसूस होती कि मैं अपने बच्चे का ख्याल नही रख पाती और ऊपर से घर, पति बच्चा, सब कुछ अकेले सम्हालते हुए बेहद चिड़चिड़ी हो गयी। एक दिन सोचा कि इसका उपाय ढूंढा जाएं, मैं रोज तो सतावरी का ये झंझट वाला उपयोग खुद के लिए नही कर सकती, क्यों न ऑनलाइन इससे सम्बंधित खोजू, शायद कुछ आसानी से उपयोग करने वाली वस्तु मिल जाये। मैंने गूगल पर सर्च किया तो मुझे firstcry, amezon पर एक प्रोडक्ट दिखा “झंडू स्त्रीवेदा”। मैंने इसके विषय मे पढ़ा, ये बहुत ही उपयोगी लगा, क्योंकि इसकी विशेषताओं में बहुत कुछ है और खासकर इसमे शतावरी का प्रयोग किया गया है। 1.शतावरी एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक गैलेक्टोगॉग जड़ी बूटी है, जो स्तनपान कराने वाली माताओं को उनके हार्मोनल संतुलन को नियंत्रित करने और स्तनपान को बढ़ावा देने में मदद करती है। जिसे अक्सर डॉक्टरों द्वारा निर्धारित किया जाता है, और यह प्राकृतिक, पौष्टिक और सुरक्षित है, जिसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। 2.शतावरी लैक्टेशन सप्लीमेंट चिकित्सकीय रूप से जांचे जाने वाले उत्पाद हैं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए सुरक्षित और प्रभावी साबित होते हैं। 3. यह 100% शाकाहारी है, क्योंकि शतावरी एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जो प्रसव बाद माँ के दूध की मात्रा और गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करती है। 4. यह प्रोडक्ट वैज्ञानिक रूप से सिद्ध किया गया है और चिकित्सकीय परीक्षण किया गया है। 5. इस प्रोडक्ट को डॉक्टर भी उपयोग करने को सलाह देते हैं। 6.इसका सेवन भी आसान है, बस 1 या 2 चम्मच गर्म या डंडे दूध में या पानी मे मिला कर लिया जाता है। 7.इसमे शतावरी और चीनी का उपयोग किया गया है, इसलिए इसमें कुछ भी मिलाने की आवश्यकता नही है। अपने स्वाद के लिए अलग से शहद या चीनी का उपयोग कर सकते हैं। 8.इसके कुछ फ्लेवर भी उपलब्ध है। 9. हालांकि ये आयुर्वेदिक, 100%शाकाहारी और चिकित्सिय परीक्षित है, पर चीनी मिश्रित होने के कारण मधुमेह ग्रसित महिला इसका सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के न लें। इन सब बातों को जानने के बाद मुझे लगा झंडू एक पुराना और विश्वसनीय नाम है और मेरी समस्या का समाधान भी है। ये पूरी तरह से शाकाहारी, आयुर्वेदिक जड़ी बूटी शतावरी से बना हुआ है तो क्यों न इसका उपयोग करके देखू, शायद मुझे फायदा मिले। बस ये ही सोचकर मैंने इसका सेवन शुरू किया और ये मेरे लिए फायदेमंद साबित हुआ। अब मेरा बेटा स्तनपान करके सन्तुष्ट होता है, पहले की तरह रोता नही और न बार-बार जागता है। मेरे बेटे का स्वास्थ भी पहले से बेहतर है, क्योंकि मेरी दूध की गुणवत्ता बढ़ने से अब उसे हर पोशक तत्व मिल रहे हैं जो उसे स्तनपान से मिलने चाहिए। सच में ये “हर नयी माँ के लिए भारत का पहला आयुर्वेदिक स्त्रोत है, जो हर नयी माँ का दूध बदलने और उसकी गुणवत्ता बढ़ाने में मददगार है”। मुझे तो इसके उपयोग से सन्तुष्टि मिली, हो सकता है मेरी जैसी अन्य नयी माँएं इसका सेवन करके लाभ उठा सकती है। अगर आप भी इस तरह की समस्या से परेशान है तो “झंडू स्त्रीवेदा” आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता है।